रत्नेश्वर महादेव मंदिर(Ratneshwar Mahadev temple)या वाराणसी का झुका हुआ मंदिर

रत्नेश्वर महादेव (Ratneshwar Mahadev temple) मंदिर जिसे मातृ-ऋण महादेव या वाराणसी का झुका हुआ मंदिर भी कहा जाता है, यह बनारस का एक ऐसा मंदिर है जिसमे 8 महीने कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता है, लगभग 400 साल पुराना काशी के मणिकर्णिका घाट और सिंधिया घाट के ठीक बीच में गंगा नदी की तलहटी में स्थित यह रत्नेश्वर महदेव जी का मदिर (Ratneshwar Mahadev temple)पूरे ९ डिग्री झुका हुआ है |

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क्या रत्नेश्वर महादेव (Ratneshwar Mahadev temple) ही है काशी करवट ?

रत्नेश्वर महादेव (Ratneshwar Mahadev temple) के इस मंदिर को कुछ लोग काशी करवट नाम से भी जानते है, लेकिन वास्तविकता यह नहीं है काशी करवट एक अलग मंदिर है जो काशी विस्वनाथ मंदिर के पास में है ,

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कैसे हुआ रत्नेश्वर महादेव मदिर (Ratneshwar Mahadev temple) का निर्माण

इस रत्नेश्वर मदिर (Ratneshwar Mahadev temple) का निर्माण आज से लगभग ४०० वर्ष पहले महारानी अहिल्याबाई होल्कर की दासी रत्न बाई ने बनवाया था
कहते है महारानी अहिल्याबाई होल्कर की दासी ने इस मंदिर को बनवाने की इच्छा जताई थी, दासी के कहने पर महारानी अहिल्याबाई ने गंगा नदी के तट की यह जमीन दासी को मंदिर बनाने के लिए दे दिया। अहिल्याबाई की दासी रतनबाई ने इस मंदिर का निर्माण कार्य को पूरा करवाया।
जब मंदिर पूर्ण रूप से बनकर संपन्न हुआ तब रत्न बाई ने रानी को मंदिर दिखाया , यह मंदिर बहुत ही भव्य और खूबसूरत था यह देखकर रानी अहिल्याबाई ने दासी को मंदिर को नाम न देने की बात कही, रानी के मना करने के बाद भी दासी ने इस मंदिर का नाम अपने नाम से जोड़ते हुए रत्नेश्वर मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple) रख दिया। हलाकि कहा यह भी जाता है कि नव रत्नो के आधार पर इस मंदिर का नाम रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple) रखा गया क्योकि यहाँ भगवान् शिव के 9 शिवलिंग है
माना जाता है की जैसे ही इस मंदिर का नाम रत्नेश्वर मदिर (Ratneshwar Mahadev temple) पड़ा वैसे ही यह मंदिर एक तरफ दाहिनी ओर झुक गया

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क्यों प्रशिद्ध है काशी का रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple)

रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple) में बनी हुई कलाकृतिया देखने योग्य है दीवारों और पिलरों पर बनी हुई नक्कासिया और लिखावट बहुत ही मनमोहक प्रतीत होती है
इस रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple) की ख़ूबसूरती देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशो से भी लोग आया करते है इस मंदिर में भगवान् शिव के एक नहीं बल्कि आठ शिवलिंग बनाये गए है, और इनके अलग अलग नाम भी है,
हलाकि यह शिवलिंग साल के आठ महीने गंगा जल में ही डूबा रहता है और चार महीने पानी के बाहर इस कारण इस कारण इस मंदिर में 8 महीने भगवान शिव के दर्शन नहीं किये जा सकते , भगवान् शिव का यह शिवलिंग अधिकतर मिटटी में दबा ही रहता है, 4 महीने बाद जब भी यह शिवलिंग जल से बाहर आता है तो नगर निगम के द्वारा बाहरी सफाई करवाई जाती है और ,मदिर के अंदर की सफाई स्थानीय लोग श्रम दान करके करते है

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रत्नेश्वर महादेव मंदिर से जुडी हुई भ्रांतिया

इस रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple) को लेकर लोगो में अलग अलग तरह की बाते भी कही जाती है , कुछ लोगो का कहना है की यह मंदिर गंगा नदी के तट पर बने होने के कारण झुका हुआ है, और कुछ लोगो का कहना है की यह मंदिर शापित है
एक कथा के अनुसार लोगो का कहना है कि प्राचीन काल में एक संत संकट मोचन के दर्शन के लिए यह बैठा करते थे, लेकिन एक समय इस स्थान पर काफी बाढ़ आ गयी किन्तु संत समाधी में लींन थे कहा जाता है की बाढ़ का पानी उनके भर को सहन ना कर सका इस कारण मंदिर तिरछा हो गया , हलाकि इस तरह की अनेक भ्रांतिया इस मंदिर के बारे में कही जाती है किन्तु इस मंदिर के टेढ़े होने के विषय में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है
आज से लगभग ४०० साल पहले यह रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev temple) जब बनाया गया था तब से आज तक एक ही स्थिति में ९ डिग्री झुका हुआ है खास बात यह है की यह मंदिर तब से लेकर आज तक उसी स्थिति में है जैसा आज से ४०० साल पहले था |

Preeti Gupta
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Hi, I am Preeti Gupta, Content Creator of the "Yatra with Preeti" YouTube Channel, And Passionate Content Writer related to Religious Niches like Temple's History, Importance of Puja & Path

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