बनारस का भव्य ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple)

काशी नगरी भगवान शिव की प्रिय नगरी है यहाँ पर भगवान् शिव अपने ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करते है, लेकिन क्या आप जानते है काशी यानि बनारस में भगवान् ढुण्ढीराज गणेश का भी मंदीर (Dundi Ganapathi Temple) स्थापित है जो बहुत ही प्राचीन है और सदियों से भक्त जन भगवान् शिव की पूजा के साथ साथ भगवान् गणेश की पूजा (Dundi Ganapathi Temple) में करने के लिए भी आते है हलाकि मंदिर की प्राचीनता के विषय में स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है |

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सम्पूर्ण परिवार के साथ ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में विराजते है भगवान् गणेश

हिन्दू धर्म के मान्यताओ के अनुसार भगवान् गणेश सभी देवताओ में सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय है , कोई भी शुभ कार्य या पूजा पाठ सुरु करने से पहले भगवान् गणेश की पूजा (Dundi Ganapathi Temple) सबसे पहले की जाती है।
काशी ,में लोहटिया नामक स्थान पर भवान गणेश अपने परिवार यानि अपनी दोनों पत्निया रिद्धि सिद्धि और अपनी संतान शुभ लाभ के साथ ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में स्थित है , इन्हें बड़ा गणेश भी कहते हैं, ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में भगवान् गणेश त्रिनेत्र के रूप में स्थापित है मान्यता है कि गणेश जी के इस रूप की उपासना करने से व्यक्ति को ऋद्धि- सिद्धि तथा शुभ-लाभ की प्राप्ति होती है।
यहाँ ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में भगवान गणेश के साथ उनकी प्रिय सवारी मूसक राज की भी मूर्ति स्थापित है ,

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कब होता है ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में पूजा का विशेष महत्व

माघ माष की कृष्ण पक्छ की संकस्टी चतुर्दशी को ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में पूजा का विशेष महत्व होता है, मान्यता है की कृष्ण पक्छ की संकस्टी चतुर्दशी को भगववान गणेश का आविर्भाव हुआ था, इस दिन को भगवान गणेश के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, इसके साथ साथ ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में गणेश जी कि छठी भी मनाई जाती है |

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क्यों है ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) इतना प्रसिद्ध

भगवान् गणेश सभी देवताओ में सर्वश्रेष्ठ है इसलिए इन्हे देवाधि देव भी कहा जाता है
काशी में भगवान् गणेश का यह मंदिर बहुत ही विख्यात मंदिर है ,यहाँ भगवान् गणेश के स्वम्भू रूप के दर्शन प्राप्त होते है ,और इसलिए ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) इतना प्रसिद्ध है

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कैसे होती है ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में खास पूजा

भगवान् गणेश के इस ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में बंद कपाट में ख़ास पूजा होती है, इस पूजा को देखने की अनुमति किसी को भी नहीं होती है, काशी के इस गणेश मंदिर में सावन महीने में हरियाली श्रृंगार और भादो माष में एक भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है, काशी के इस ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में भगवान् गणेश की पूजा और श्रृंगार का विशेष महत्त्व है|
काशी के ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में तीन बार आरती होती है, एक बार सुबह ५ बजे भोर आरती, मध्यान यानि दोपहर में भोग आरती और रात्रि ११ बजे इस ढुण्ढीराज गणेश मंदिर में शयन आरती कि जाती है। बुधवार के दिन का इस मंदिर में विशेष महत्व होता है

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क्या है ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) की खासियत

काशी का यह ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) 40 खम्भों पर बनाया गया मंदिर है, 40 खम्भों पर बने हुए मंदिर का भी हिन्दू धर्म में बहुत महत्त्व है , इस मंदिर में पथरो को तराश कर मंदिर को बहुत ही खूबसूरत बनाया गया है, इस मंदिर के दरवाजे चौखट और खम्भों में बहुत सुन्दर कलाकृति देखने को मिलती है , चांदी के छत्र के निचे विराजमान भगवान् गणेश त्रिनेत्र के रूप स्थापित है |

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ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में होने वाले खास महोत्सव

मान्यता है कि आज से लगभग २ हजार वर्ष पहले जब काशी में माँ गंगा के साथ मन्दाकिनी नदी का अस्तित्वा था उसी समय भगवान् गणेश यहाँ स्वं प्रकट हुए थे जो तब से लेकर आजतक यहाँ अपने मूल स्वरुप में विराजमान है
कहते है जो भी इस काशी स्थित ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में सच्ची श्रद्धासे पूजा करता है उसके सभी कार्य निर्विघन्ता से पूरे होते है
काशी नगरी में 56 विनायक है किन्तु ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) इन सभी मंदिरो में सर्वश्रेष्ठ है, इनको बड़ा गणेश जी भी कहते है, ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) में अन्नकूट महोत्सव भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है साथ हिया वृहद् वार्षिक श्रृंगार भी मनाया जाता है, स्थानीय लोग इस दिन अपने अपने तरीके से भगवान गणेश का श्रृंगार भी करते है।
भगवान गणेश को बेसन के लड्डू अति प्रिय है इसलिए इन्हे लड्डू और दूर्वा चढ़ाया जाता है साथ ही 56 प्रकार का भोग भी लगया जाता है।

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ढुण्ढीराज गणेश मंदिर (Dundi Ganapathi Temple) की कथा

कहते है आदि काल में सिंधुरासुर नाम का एक दानव था जिसको मारने के लिए भगवान गणेश ने अपने तीसरे नेत्र को खोला था जिसके प्रताप से उस दानव का सर्वनाश हुआ था और सृष्टि कि रक्षा हुई थी।

Preeti Gupta
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